जो पच पच करते होटों से |
कर सका धरा सिंगार नहीं ||
जों सड़क किनारे पौधों को |
कर सका अर्पण जलधार नहीं ||
जों मदद के भूखे प्यासे को |
दे सका उपदेश भरभार नहीं ||
जो चूस सका ना मच्छर बन |
इस भारत माँ की जान नहीं ||
जो चबा सका ना दीमक बन |
अपने स्वदेश की बुनियाद नहीं ||
जो मिला पानी को चूने में |
बेच सका दूध के दाम नहीं ||
जो गटर में उगती सब्जी का |
ले सकी जिह्वा गर स्वाद नहीं ||
जो सामने आती नारी के |
कर सका रूप का पान नहीं ||
जो राह में आते प्राणी पर |
कर सका शब्द बौछार नहीं ||
जो मिला सका मिठाइए में |
सड़ते गोबर का स्वाद नहीं ||
जो हस्पताल में रहकर भी |
कर सका किडनी व्यापार नहीं ||
जो बनके माता का रक्षक |
बन सका आज ध्रितराष्ट्र नहीं ||
जो बनके माता का सेवक |
कर सका दुशाशन सा काम नहीं ||
कहते चाचा उस भारत वासी को |
अपने स्वदेश से प्यार नहीं ||
भारत माता की जय | जय हिंद ||
~तरुण सुन्द्रियाल
~ इति ~
Nice one, liked few lines then others. Good.
ReplyDeleteKya ho gaya hai sir aapko
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